ये पांचों रूप हैं मुझको प्यारे करते हैं देह भान से न्यारे ये पांचों रूप हैं मुझको प्यारे करते हैं देह भान से न्यारे आओ याद करें अपने वो रूप मैं आत्मा अनादि स्वरूप ज्योति बिंदु रूप है मेरा मैं आत्मा, बेदाग सा हीरा ज्योति बिंदु रूप है मेरा मैं आत्मा, बेदाग सा हीरा सात गुणों से जो भरपूर परम धाम का मैं हूँ नूर परम धाम का मैं हूँ नूर सतयुग का दृश्य है न्यारा मैं देवता, फूलों सा प्यारा सतयुग का दृश्य है न्यारा मैं देवता, फूलों सा प्यारा राजा बनकर राज करूँ देवों के संग, मैं रास करूँ देवों के संग, मैं रास करूँ पूज्य रूप है कितना प्यारा भक्तों का मैं बना सहारा पूज्य रूप है कितना प्यारा भक्तों का मैं बना सहारा दुखियों के दुख दूर मैं करता सबकी चाहना पूरी करता सबकी चाहना पूरी करता ब्राह्मण रूप में, मधुबन आई ज्ञान रत्नों की झोली पाई। ब्राह्मण रूप में, मधुबन आई ज्ञान रत्नों की झोली पाई। बाबा का बन, सेवा में डूबी संगमयुग की महक अनोखी। संगमयुग की महक अनोखी। फरिश्ता बन, उड़ता मैं जाऊँ, मोह-माया सब छोड़के आऊँ फरिश्ता बन, उड़ता मैं जाऊँ, मोह-माया सब छोड़के आऊँ ज्ञान योग के पंख फैलाता बाबा का संदेश सुनाता बाबा का संदेश सुनाता ये पांचों रूप हैं मुझको प्यारे करते है देह भान से न्यारे करते है देह भान से न्यारे