आ आ .......
आ आ ......
पर्वत से ऊंची सागर से गहरी
सोच तुम्हारी ओ मम्मा
पर्वत से ऊंची सागर से गहरी सोच तुम्हारी ओ मम्मा
फूलों से कोमल मिश्री से मीठी याद तुम्हारी ओ मम्मा
पर्वत से ऊंची सागर से गहरी सोच तुम्हारी ओ मम्मा
मधुबन की गलियों को, फूलों को ,कलियों को रहता सदा इंतज़ार तेरा
मधुबन की गलियों को, फूलों को ,कलियों को रहता सदा इंतज़ार तेरा
कैसे भुलायेगा कोई भी पाया है जिसने प्यार तेरा
अम्बे भवानी कहकर करे जग पूजा तुम्हारी ओ मम्मा
फूलों से कोमल मिश्री से मीठी याद तुम्हारी ओ मम्मा पर्वत से ऊंची सागर से गहरी सोच तुम्हारी ओ मम्मा
आ आ .......
आ आ .......
एक बार फिर से लौट के आ जा तुझको पुकारे बच्चे तुम्हारे
एक बार फिर से लौट के आ जा तुझको पुकारे बच्चे तुम्हारे
फिर से लुटाजा हम बच्चों पर अपने स्नेह के अयुट भंडारे
तरस रहे तेरे प्यार के खातिर सबकी प्यारी ओ मम्मा
फूलों से कोमल मिश्री से मीठी याद तुम्हारी ओ मम्मा
पर्वत से ऊंची सागर से गहरी सोच तुम्हारी ओ मम्मा
आज भी दुनिया झोली फैलाये मांग रही तुझसे वरदान
आज भी दुनिया झोली फैलाये मांग रही तुझसे वरदान
शक्तियां तेरी परम अनोखी इनसे ही तेरी पहचान
पत्थर मन पिघलाने वाली दृष्टी तुम्हारी ओ मम्मा
फूलों से कोमल मिश्री से मीठी याद तुम्हारी ओ मम्मा पर्वत से ऊंची सागर से गहरी सोच तुम्हारी ओं मम्मा
पर्यंत से ऊंची सागर से गहरी सोच तुम्हारी ओ मम्मा
पर्वत से ऊंची सागर से गहरी सोच तुम्हारी ओ मम्मा
