प्रभु के प्यारे भर लो मन की झोलियाँ
खुला हुआ भण्डार मेरे बाबा का
जन्म-जन्म की प्यास सबकी बुझ रही है
बरस रहा है प्यार मेरे बाबा का
प्रभु के प्यारे भर लो मन की झोलियाँ.....
मन-आँगन में उसे बसा लो
दिल का अपने मीत बना लो
क्या कहिये खुशियाँ कितनी मिल रही हैं
ममता भरा दुलार मेरे बाबा का
प्रभु के प्यारे भर लो मन की झोलियाँ...
ऊँच-नीच का भेद न कोई
देर है पर अन्धेर न कोई
किस्मत की सुनवाई फिर से हो रही है
साँचा है दरबार मेरे बाबा का
प्रभु के प्यारे भर लो मन की झोलियाँ.....
