

"प्रेममयी संसार बने प्रकृति का हम वंदन करे प्रेममयी संसार बने प्रकृति का हम वंदन करे ईश्वर की रचना पांच तत्व का ईश्वर की रचना पांच तत्व का दिल से अभिनंदन करें प्रेममयी संसार बने प्रकृति का हम वंदन करे प्रेममयी संसार बने प्रकृति का हम वंदन करे हरियाली से है खुशहाली उपहार जो है मिला इंद्रधनुष इन्हींसे बनता इनसे अंबर है मिला हरियाली से है खुशहाली उपहार जो है मिला इंद्रधनुष इन्हींसे बनता इनसे अंबर है मिला जो देता है जीवन दान हमको उनको देखने का मन करें प्रेममयी संसार बने प्रकृति का हम वंदन करे प्रेममयी संसार बने प्रकृति का हम वंदन करे प्यार करें सत्कार करें हम करें पालना प्यार से इनके बिना ना जल बरसता जल के बिना ना संसार है प्यार करें सत्कार करें हम करें पालना प्यार से इनके बिना ना जल बरसता जल के बिना ना संसार है जागे जगाएं इन्हीं राहों में आओ मिल गमन करें प्रेममयी संसार बने प्रकृति का हम वंदन करे प्रेममयी संसार बने प्रकृति का हम वंदन करे सुबह की मीठी चहक हो सूरज की हो नरम किरण ताजगी अंतर में भरता सुर मई शीतल पवन सुबह की मीठी चहक हो सूरज की हो नरम किरण ताजगी अंतर में भरता सुर मई शीतल पवन कहता गगन हम से ये कुछ नया सृजन करें प्रेममयी संसार बने प्रकृति का हम वंदन करे प्रेममयी संसार बने प्रकृति का हम वंदन करे नैनों को मिलती है रोशनी मन को मिलता सुख और चैन परम हितकारी सबके लिए है निहारते गगन के नैन नैनों को मिलती है रोशनी मन को मिलता सुख और चैन परम हितकारी सबके लिए है निहारते गगन के नैन सदा हो सुरक्षा ऐसा इनकी आओ यज्ञ हवन करे प्रेममयी संसार बने प्रकृति का हम वंदन करे प्रेममयी संसार बने प्रकृति का हम वंदन करे कितना प्यारा लगे नजारा जहां हरा भरा हो भरपूर फल फूलों से महके वो उपवन खुशियों का छलकाये नूर कितना प्यारा लगे नजारा जहां हरा भरा हो भरपूर फल फूलों से महके वो उपवन खुशियों का छलकाये नूर सबको सुनाएं अर्ज ये पाए हर दिन यही कीर्तन करे प्रेममयी संसार बने प्रकृति का हम वंदन करे प्रेममयी संसार बने प्रकृति का हम वंदन करे शान हमारी जान हमारी ये हमारा मान है धन्यवाद करें तहे दिल से हम पे बड़ा एहसान है शान हमारी जान हमारी ये हमारा मान है धन्यवाद करें तहे दिल से हम पे बड़ा एहसान है अपने कर्मो से इस वीरान को शीतल सुखद पावन करें प्रेममयी संसार बने प्रकृति का हम वंदन करे प्रेममयी संसार बने प्रकृति का हम वंदन करे सारे ब्रह्मांड से है अलग ये प्यारा विश्व हमारा है हरियाली इसकी आत्मा है सबसे अनुपम न्यारा है सारे ब्रह्मांड से है अलग ये प्यारा विश्व हमारा है हरियाली इसकी आत्मा है सबसे अनुपम न्यारा है सुख पाते इन्हींसे प्राणी मात्र इनको अब जीयदान करें प्रेममयी संसार बने प्रकृति का हम वंदन करे प्रेममयी संसार बने प्रकृति का हम वंदन करे उपजाते अन प्राण जगाते कुदरत की है ये देन सुखमय बने सारा जगत ये वो हसीन हर दिन हर रैन उपजाते अन प्राण जगाते कुदरत की है ये देन सुखमय बने सारा जगत ये वो हसीन हर दिन हर रैन मंगलमय मधुर दिव्य ध्वनि से आओ अभिवादन करें प्रेममयी संसार बने प्रकृति का हम वंदन करे प्रेममयी संसार बने प्रकृति का हम वंदन करे दवा यही बनकर हमारे रोग सभी दूर करते है सुंदर लगता सारा संसार वन उपवन जो सजते है दवा यही बनकर हमारे रोग सभी दूर करते है सुंदर लगता सारा संसार वन उपवन जो सजते है बनकर देव पालना दे इनको फिर सगन करें प्रेममयी संसार बने प्रकृति का हम वंदन करे प्रेममयी संसार बने प्रकृति का हम वंदन करे लुप्त न हो जाए कहीं ये जिंदा ना रह पाएंगे इनके होने से ही तो प्राणी मात्र मुस्काएंगे लुप्त न हो जाए कहीं ये जिंदा ना रह पाएंगे इनके होने से ही तो प्राणी मात्र मुस्काएंगे पहेली सबकी मुझे ही करना फिर सब मिल जन जन करें प्रेममयी संसार बने प्रकृति का हम वंदन करे प्रेममयी संसार बने प्रकृति का हम वंदन करे जन्मा है विज्ञान इन्हीसे अध्यात्म इसकी पहचान इसमें समाया राज अनोखा कहते आयुर्वेद और भगवान जन्मा है विज्ञान इन्हीसे अध्यात्म इसकी पहचान इसमें समाया राज अनोखा कहते आयुर्वेद और भगवान आनन्द भरा उपहार स्वर का विनम्रतासे प्रणाम करे प्रेममयी संसार बने प्रकृति का हम वंदन करे प्रेममयी संसार बने प्रकृति का हम वंदन करे धरती मां की गोद में हम बड़े प्यार से पलते है प्रकृति के आंचल में हम सब स्नेह से चलते है धरती मां की गोद में हम बड़े प्यार से पलते है प्रकृति के आंचल में हम सब स्नेह से चलते है खुश हो पाए वो मनसे जो फूलों से पूजन करे प्रेममयी संसार बने प्रकृति का हम वंदन करे प्रेममयी संसार बने प्रकृति का हम वंदन करे बूंद बरसती है इन्ही से इन्ही से महके है फिजाएं खुशियां बिखरे हर एक मन में सारी सृष्टि को ये सजाए बूंद बरसती है इन्ही से इन्ही से महके है फिजाएं खुशियां बिखरे हर एक मन में सारी सृष्टि को ये सजाए जग जाग उठा हो अब हरियाली हो ऐसा स्वर गुंजन करे प्रेममयी संसार बने प्रकृति का हम वंदन करे प्रेममयी संसार बने प्रकृति का हम वंदन करे सागर पर्वत नदिया झरने धरती अंबर चांद और तारे सृष्टि के है ये है वरदान सदा साथ रहते है हमारे सागर पर्वत नदिया झरने धरती अंबर चांद और तारे सृष्टि के है ये है वरदान सदा साथ रहते है हमारे लुफ्त उठाए हर मंजर का मन ही मन बखान करे प्रेममयी संसार बने प्रकृति का हम वंदन करे प्रेममयी संसार बने प्रकृति का हम वंदन करे रक्षा करे ये रतन हमारे हर जगह हर वक्त पर इन्ही से जीते मिलता जीवन सदा करे इनका आदर रक्षा करे ये रतन हमारे हर जगह हर वक्त पर इन्ही से जीते मिलता जीवन सदा करे इनका आदर सब से बड़ी शुभ सेवा है तन मन को अर्पण करे प्रेममयी संसार बने प्रकृति का हम वंदन करे प्रेममयी संसार बने प्रकृति का हम वंदन करे रहते है सुखी जिस जहां में स्वस्थ प्रकृति के कारण फिर से हराभरा बनाने करें दुखों का निवारण रहते है सुखी जिस जहां में स्वस्थ प्रकृति के कारण फिर से हराभरा बनाने करें दुखों का निवारण स्नेहमय स्वर्ग राह जिसे प्रकृति को पावन करे प्रेममयी संसार बने प्रकृति का हम वंदन करे प्रेममयी संसार बने प्रकृति का हम वंदन करे रचता की ये सुंदर रचना अनुपम मिली सौगात है रखेगा यम इस हरियाली को ध्यान रखे यही बात है रचता की ये सुंदर रचना अनुपम मिली सौगात है रखेगा यम इस हरियाली को ध्यान रखे यही बात है कुदरत के अजूबे ये करिश्मा इनका सदा सम्मान करे प्रेममयी संसार बने प्रकृति का हम वंदन करे प्रेममयी संसार बने प्रकृति का हम वंदन करे पनाह में पलते है इनकी बात ये हम ना भूले पौधें लगाए सबको सिखाए मिलके मंजिल को छू ले पनाह में पलते है इनकी बात ये हम ना भूले पौधें लगाए सबको सिखाए मिलके मंजिल को छू ले इनकी स्नेह में रचकर राहों हम भी अब नरतन करे प्रेममयी संसार बने प्रकृति का हम वंदन करे प्रेममयी संसार बने प्रकृति का हम वंदन करे नरक बने इस संसार को फिर से स्वर्ग बनाना है जिंदाबाद हो हरियाली का यही नारा लगाना है नरक बने इस संसार को फिर से स्वर्ग बनाना है जिंदाबाद हो हरियाली का यही नारा लगाना है घर घर सुखमय बने फिर से ऐसा शुभ चिंतन करे प्रेममयी संसार बने प्रकृति का हम वंदन करे प्रेममयी संसार बने प्रकृति का हम वंदन करे ईश्वर की रचना पांच तत्व का ईश्वर की रचना पांच तत्व का दिल से अभिनंदन करें प्रेममयी संसार बने प्रकृति का हम वंदन करे प्रेममयी संसार बने प्रकृति का हम वंदन करे प्रेममयी संसार बने प्रकृति का हम वंदन करे"