पुलकित है तन गदगद है मन
स्वागत सुमन अर्पण करे
पुलकित है तन गदगद है मन
स्वागत सुमन अर्पण करे
युग शिल्पियों का हम हृदय से
कोटि अभिनन्दन करे
पुलकित है तन गदगद है मन
स्वागत सुमन अर्पण करे
खुद को बदलकर जगको बदले
ये प्रभूकी योजना
उसमे अपनो से मिलन का
योग भी आकर बना
अतिथि देवो भव का
गुंजन यहां तड़पंन करे
युग शिल्पियों का हम हृदय से
कोटि अभिनन्दन करे
पुलकित है तन गद गद है मन
स्वागत सुमन अर्पण करे
चाहते गर हर हृदयमें
एक सचेतन गीत जागे
प्रीत जागे रीत जागे
प्रीत का संगीत जागे
स्वर्ण युग के साधकों
अब साधना सृजन करे
युग शिल्पियों का हम हृदय से
कोटि अभिनन्दन करे
पुलकित है तन गद गद है मन
स्वागत सुमन अर्पण करे
आपकी झांकी में झांके
झलकती तसवीर है
परम शिक्षक से मिली
त दबिर क्या तकदीर है
मूल्यों के है माली आओ
जग चमन सिंचन करे
युग शिल्पियों का हम हृदय से
कोटि अभिनन्दन करे
पुलकित है तन गद गद है मन
स्वागत सुमन अर्पण करे
स्वागत सुमन अर्पण करे
स्वागत सुमन अर्पण करे
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