सहज हमे भगवान मिल गए सहज सरल सब बात है
सहज हमे भगवान मिल गए सहज सरल सब बात है
सहज हमे भगवान मिल गए
सूरज आया चांद उगा तब ज्ञान सितारे खिल गए चलते चलते अनायास प्रभु प्रेम पंथ में मिल गए संगम की ये मीठी रिमझिम अमृत की बरसात है
सहज हमे भगवान मिल गए सहज सरल सब बात है
स्वयं रचयिता निज रचना का सर ज्ञान बता रहे
भाग चले सब विकार जो कल तक हमे सता रहे
नई सृष्टि का नया सवेरा बीती काली रात है
सहज हमे भगवान मिल गए सहज सरल सब बात है
अमृत कलश धारणी जननी हमको अमृत पीला रही
भस्मी भूत हुए शत शत उनको वो ही दिला रही
आदि पिता कर रहा सम्हाल बहु लोरी देत मात है
सहज हमे भगवान मिल गए
सहज सरल सब बात है
सहज हमे भगवान मिल गए
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