समय की मांग यही है आवाज़ यही है
आज की समय मांग यही है आवाज़ यही है आज की आध्यात्मिक जीवन द्वारा हो स्थापना
मूल्य निष्ट समाज कि
प्रेम निष्ट हो नया समाज
धर्म निष्ठ हो नया समाज
न्याय निष्ट हो नया समाज
कर्म नष्ट हो नया समाज
समय की मांग यही है आवाज़ यही है आज की समय की मांग यही है आवाज़ यही है आज की
इस धरती को
ऐसा सजाएं
घर घर को
हम स्वर्ग बनाएं
अब स्वराज्य से
विश्वराज हो
जग में शांति का
सामराज्य हो
अब स्वराज्य से
विश्वराज हो
जग में शांति का
सामराज्य हो
भूमील पड़े ना आभा
भारत माता के ताजी की
समय की मांग यही है
आवाज़ यही है आज की आध्यात्मिक जीवन द्वारा हो स्थापना
मूल्य निष्ट समाज की
प्रेम निष्ट हो नया समाज
धर्म नष्ट हो नया समाज
न्याय निष्ट हो नया समाज
कर्म निष्ट हो नया समाज
एक माली के
फूल है सारे
फिर क्यों भेद भाव
बटवारे
सद्भावो की
ऊच के माला
दिये फिराए
प्रेम का प्याला
सद्भावो की
भूत के माला
पिए पिराए
प्रेम का प्याला
वाणी में वीना हो
रुची हो सेवा की साज कि
समय की मांग यही है
आवाज़ यही है आज की आध्यात्मिक जीवन द्वारा स्थापना मूल्य निष्ट समाज की
प्रेम नष्ट हो नया समाज
धर्म नष्ट हो नया समाज
न्याय निष्ट हो नया समाज
कर्म निष्ट हो नया समाज
धर्म अहिंसा
वीरों का आभूषण
प्राणी मात्र को दे संरक्षण
नियम निभाए
संयम धारे
पवित्रता से
चरित्र निखारे
नियम निभाए
संयम धारे
पवित्रता से
चरित्र निखारे
बन सबके सहयोगी
करें चिंता परहित काज की
समय की मांग यही है
आवाज़ यही है आज की आध्यात्मिक जीवन द्वारा हो स्थापना मूल्य निष्ट समाज की
प्रेम निष्ट हो नया समाज
धर्म निष्ट हो नया समाज
न्याय निष्ठा नया समाज
कर्म निष्ठा नया समाज
समय की मांग यही है
आवाज़ यही है आज की
समय की मांग यही है
आवाज़ यही है आज की
प्रेम निष्ट हो नया समाज
धर्म निष्ठ हो नया समाज
न्याय निष्ठा हो नया समाज
कर्म निष्ट हो नया समाज.....
