शांति का स्वर्णिम सवेरा आ रहा - आ रहा
दुख और अशांति का अंधेरा जा रहा- जा रहा
एक ही ये शिव ज्ञान सूरज हो उदय-हो उदय
शांति की किरणे वो बिखरा रहा -बिखरा रहा
शांति मे, आनंद में मन गा रहा - गा रहा
शांति का स्वर्णिम सवेरा आ रहा -आ रहा
दुख और अशान्ति का अंधेरा जा रहा - जा रहा
भोर से पहले की है ये कालिमा
वो फैलती जा रही है लालिमा
भोर से पहले की है ये कालिमा
वो फैलती जा रही है लालिमा
चेतना के द्वार खोलो, देख लो
इतनी पुलकित है,प्रफुल्लित धरती मां
शांति का संसार,शिव है ला रहा
शांति का संसार, शिव है ला रहा
शांति का स्वर्णिम सवेरा आ रहा -आ रहा
दुःख और अशांति का अंधेरा जा रहा -जा रहा
जाग उठी भारत की हैं सन नारियां
सद्गुणों से सजकर ब्रह्मा-कुमारियां
जाग उठी भारत की हैं सन नारियां
सद्गुणों से सजकर ब्रह्मा- कुमारियाँ
मंदिरों मे जिनके जगराते किए
वो जगह थी सींचती मन _
शांति का सागर लहर लहरा रहा -लहरा रहा
शांति का स्वर्णिम सवेरा आ रहा -आ रहा
दुःख और अशांति का अंधेरा जा रहा -जा रहा
शांति दाता शिव-पिता को जानिए
आत्मा मे शांति मैं हूं मानिए
शांति दाता शिव पिता को जानिए
आत्मा में शांति मैं हूं मानिए
शांति का भंडार अंतर मे भरो
शांति अपना धर्म है पहचानिए
शांति का परिचम पुनः फहरा रहा -फहरा रहा
शांति का स्वर्णिम सवेरा आ रहा -आ रहा
दुःख और अशांति का अंधेरा जा रहा -जा रहा
शांति का स्वर्णिम सवेरा आ रहा -आ रहा
दुःख और अशांति का अंधेरा जा रहा -जा रहा
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