िव पिता की याद दिल से ना विसारिए
शिव पिता की याद दिल से ना विसारिए
एक पल तो प्यार से उसको निहारिए
शिव पिता की याद दिल से ना विसारिए
शिव पिता की याद दिल से
जिंदगी की शाम बने कौनसा बहाना
किस मोड़ पर रुकेगी सासो का क्या ठिकाना
चादर हो जितनी उतना ही पग को पसारिए
एक पल तो प्यार से प्रभुको निहारिए
शिव पिता की याद दिल से ना विसारिए
शिव पिता की याद दिल से
साधनो में मन को भटकाइए नहीं
साधना के डर से लौट आयिये नहीं
संयम से सादगी से सूरत सवारिए
एक पल तो प्यार से प्रभुको निहारिए
शिव पिता की याद दिल से ना विसरिए
शिव पिता की याद दिल से
शुभ सोचना है सेवा सद्गुण ही संपदा है
संतोषी ही जगत में रहता सुखी सदा है
चित को नेक चिंतन से नित निखारिये
एक पल तो प्यार से प्रभुको निहारिए
शिव पिता की याद दिल से ना विसरिए
शिव पिता की याद दिल से ना विसरिए
–------------------------------------------
