िराकार शिव आत्मा देता गीता ज्ञान
ब्रम्हा मुख से पा लो रे अमर भव वरदान
शिव कहे सुन आत्मा तुम थी मेरे समान
बार बार जो उतरे तो आए देह के साथ
रे बच्चो आए देह के साथ
शांतिधाम में थे सभी अपने अनादि स्वरूप
बाबा था तब सामने तुम थे ज्योति स्वरूप
रे बच्चो तुम थे ज्योति स्वरूप
सत त्रेता तुम देवता जरा व्याधि से दूर
प्रेम शांति चहूं और थी आनंद था भरपूर
रे बच्चो आनंद था भरपूर
काम क्रोध मद लोभ से तुम्हें नहीं था काम
काम क्रोध मद लोभ से तुम्हें नहीं था काम
आत्मज्योत सबकी जगी नहीं था देहअभिमान
रे बच्चो नहीं था देहअभिमान
एक धर्म एक जात थी सभी प्रकाश समान प्रकृति प्राणी सतगुणी सुखी था सारा जहां
रे बच्चो सुखी था सारा जहां
द्वापर से अपनी करी पूजा बारम्बार
रावण आया ले गया लक्ष्मण रेखा पार
रे बच्चो लक्ष्मण रेखा पार
आत्मा बैठी पंचवटी माया मद मारीच
लक्ष्य को लांघा फस गई सीता विकारों के बीच
रे बच्चो सीता विकारों के बीच
कलयुग में तामस भये पाला जो तुमने काम
कलयुग में तामस भये पाला जो तुमने काम
मिथ्या तृष्णा में फंसे भये माया के गुलाम
रे बच्चो भये माया के गुलाम
बट गए तुम कई धर्ममें भूले जो आप और बाप
आपसमें लड़ने लगे डाल डाल और पात
रे बच्चो डाल डाल और पात
काली भयी सब आत्मा खोया जो अपना रंग
पांच विकारों ने डसा भये माया के संग
रे बच्चो भये माया के संग
दुख अशांति से घिर के ही तूने लगाई पुकार
आओ अब परमात्मा कर दो बेड़ा पर
हमारा कर दो बेड़ा पर
सुनकर बच्चो की पुकार और दुखी सब जान
सुनकर बच्चो की पुकार और दुखी सब जान
संगम में लो अा गया सृष्टि पर भगवान
तुम्हारा सृष्टि पर भगवान
अब बाबा खुद आया है तुमको देने ज्ञान राजयोग द्वारा सभी आत्मा बनेगी महान
रे बच्चो आत्मा बनेगी महान
याद करो है लाडलो अपना सत्य स्वरूप नारायण सम बच्चो तुम भूल गए क्यों रूप
रे बच्चो भूल गए क्यों रूप
भाई भाई सब आत्मा एक पिता संतान
वसुधा सारी कुटुंब है इसी में शांति मान
रे बच्चो इसी में शांति मान
प्रेम पवित्रता शांति सुख आत्मा के आधार
प्रेम पवित्रता शांति सुख आत्मा के आधार
ज्ञान योग में जो रहे शक्ति आनंद अपार
रे बच्चो शक्ति आनंद अपार
पंच तत्व तेरा शरीर भृकुटी आत्मा वास
देह रथ बुद्धि सारथी मन पे हो आत्म लगाम
रे बच्चो मन पे हो आत्म लगाम
सुख शांति नहीं साधनमें सत्य स्वरूप को जान
कस्तूरी तुझको मिले खुद को तू पहचान
रे भोले खुद को तू पहचान
ब्रम्हचर्य और शुद्ध अन्न दैवी गुण सतसंग
सत चित आनंद संग तो दूर सदाही कुसंग
ओ ब्राम्हण दूर सदाही कुसंग
सूरत सीरत आत्माकी बने तो सुंदर वो
सूरत सीरत आत्माकी बने तो सुंदर वो
पावन बनकर ऊंच उठ बाकी बचा न कोय
रे आत्मन बाकी बचा न कोय
सादगी सत्य के पास है आडंबर रहै दूर
साध सुंदर जीते थे वो तो अहम में है चुर
रे बच्चो वो तो अहम में है चुर
स्वाचिंतन है उन्नति परचिंतन दे जलाय
शुभचिंतन ऊंचा करे ऊंच सही पद पाए
रे बच्चे ऊंच सही पद पाए
पिता मै शिक्षक सदगुरु वर्सा ज्ञान बल पाय
जीवनमुक्ती राह दी सद्गति को ले जाय
रे बच्चे सद्गति को ले जाय
पतितो को पावन करू देकर सत्य ज्ञान
पतितो को पावन करू देकर सत्य का ज्ञान
दिव्य दृष्टी गुण देके ही करता सदा कल्याण
रे बच्चो करता सदा कल्याण
दिव्य रूप इस वृक्ष का उल्टा है वो लटका
अंत में जड़जड़ीभूत भया सिंचू संगम आय
रे भोले सिंचू संगम आय
सर्वात्माओ का मै पिता प्यार करू हूं अपार
तीजे नेत्र को खोले जो ले जाऊ उस पार
रे बच्चे ले जाऊ उस पार
घट घट में वासी नहीं घट घट पांच विकार
घट घट ढूंढे ना मिलू क्यों ढूंढे संसार
बता फिर क्यों ढूंढे संसार
मै मेरा सब छोड़के समय शक्ति दो दान
मै मेरा सब छोड़के समय शक्ति दो दान
ओम शांति संदेश से विश्वका करो कल्याण
ओ बच्चो विश्वका करो कल्याण
बीज डालो शुभ कर्म के बोल हो ऊंच महान
विजय तिलक धारण करो यह मेरा वरदान
रे बच्चो यह मेरा वरदान
दे दे तू कीचडा मुझे सुख शांति ले जा
साफ हृदय बन मौज में सबको देता जा
देवता सबको देता जा
ज्ञान योग गुण शक्तियां दृढ़ता खुशीकी खुराक
श्रीमत के पथ पर चलो मात पिता हो साथ
तुम्हारे मात पिता हो साथ
परमपिता के गुलगुलों रखो राजसी चलन
परमपिता के गुलगुलों रखो राजसी चलन
दिव्य अलौकिकता रखो साथ हो ज्ञान रतन तुम्हारे साथ हो ज्ञान रतन
रहम दिल शीतल रहो मन बुद्धि हो विशाल
पवित्रता गुण को चुगो निश्चय की हो साथ
रे बच्चो निश्चय की हो साथ
क्षमा सहन सहयोग परख रख कछुवासी चाल
सामना कर और निर्णय ले छोड़ ना आज और कल
रे बच्चो छोड़ ना आज और कल
व्रत रखो शुभ कर्म के जान रण नित ज्ञान
हठयोगी ना अा सके कभी बाबा के साथ
रे बच्चो कभी बाबा के साथ
आत्म वसर को भूलके बोलो मेरे साथ
आत्म वसर को भूलके बोलो मेरे साथ
बन फरिश्ता ही अा सको तुम बाबा के साथ
वो मिठे तुम बाबा के पास
दृष्टी अलौकिक मन शीतल रहमदिल हो बुद्धि बोल मधुर मुख मै सदा कर पुरुषार्थ असीम
हो शीतल देव कर पुरुषार्थ असीम
ज्ञान रूपी घृत साथ रख आत्म दीप जला
मुझमें बुद्धि की लगन जग का दर्द तू भुलाए
रे बच्चे जग का दर्द तू भुलाए
सदा दुवाएं दो वा लो चेहरे चलन में खुशी
प्रश्नों को अब दो विराम राज की बात यही
रे बच्चे राज की बात यही
कथनी करनी और रहनी करो तुम एक समान
कथनी करनी और रहनी करो तुम एक समान
दुनिया में बनकर रहो कमलपुष्प समान
रे बच्चो कमलपुष्प समान
कम धीरे मीठा बोलो ध्यान रहे हर बोल
ज्ञान रतन ही बोले तो बोल बने अनमोल
ओ बच्चो बोल बने अनमोल
बदला नहीं लो बदलो तुम जो बोवत सो पाए मानव रूप ही भोगना सुख दुख काटे खाय
रे बच्चे सुख दुख काटे खाय
ज्ञानी तू आत्मा होके ही योग में अन्तर्ध्यान विश्वहित सेवा मेरी पांडव शक्ति रहे ध्यान
