िवबाबा तेरे ज्ञान की जले विश्व में ज्योति शिवबाबा तेरे ज्ञान की जले विश्व में ज्योति
ज्ञान की इस ज्योति में मै देह भान ही भूलती
शिवबाबा तेरे ज्ञान की जले विश्व में ज्योति
काम क्रोध और लोभ मोह भी सब ही छूट जाते
योग की शक्ति से मन में विकार नहीं आते
योग की शक्ति से मन में विकार नहीं आते
अवगुण मिटते और मिटते जाती गलती
अवगुण मिटते और मिटते जाती गलती
ज्ञान की इस ज्योति में मै देह भान ही भूलती
शिव बाबा तेरे ज्ञान की जले विश्व में ज्योति
दिव्य गुणों का प्रकाश है सबके मन भाता
दिव्य स्वरूप बन जानेका लक्ष्य सामने आता
दिव्य स्वरूप बन जानेका लक्ष्य सामने आता
एक लगन की ज्योति हर दिल में है जलती
एक लगन की ज्योति हर दिल में है जलती
ज्ञान की इस ज्योति में मै देह भान ही भूलती
शिव बाबा तेरे ज्ञान की जले विश्व में ज्योति
पवित्रता और सुख शांति का बाबा है दाता
आया ब्रम्हा के तन में वो शिव भाग्य विधाता
आया ब्रम्हा के तन में वो शिव भाग्य विधाता
विश्व महायज्ञ में अंधकार रात्रि ढलती
विश्व महायज्ञ में अंधकार रात्रि ढलती
ज्ञान की इस ज्योति में मै देह भान ही भूलती
शिवबाबा तेरे ज्ञान की जले विश्व में ज्योति
शिवबाबा तेरे ज्ञान की जले विश्व में ज्योति
ज्ञान की इस ज्योति में मै देह भान ही भूलती
शिवबाबा तेरे ज्ञान की जले विश्व में ज्योति
शिवबाबा तेरे ज्ञान की जले विश्व में ज्योति
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