शुक्राना है प्रभु तेरा तूने घर की राह दिखाई
मन के मैल को धोने की सुन्दर विधि समझाई
तेरी यादों के बारिश से मन निर्मल हो जाए
शुक्राना है प्रभु तेरा तूने ज्योति जगाई
थककर बैठा था मन मेरा इस शोर भरी दुनियां में
ढूंढ रहा था चैन कही रिश्तों और गलियों में
तूने कहा शान्ति तो मेरे अपने ही अंतर में है
बस लौट चलो उस मधुर पावन गलियों में
धीरे धीरे मिट जाएगी बीते वर्षों की आदतें
प्रेम धैर्य और विश्वास बने जीवन की दौलतें
हर दिन खुद को निखारे हम हर पल उजियारा हो
कृतज्ञ हृदय में खिल ऊठे खुशियों की सौगाते
शुक्राना है प्रभु तेरा तूने घर की राह दिखाई
मन के मैल को धोने की सुन्दर विधि समझाई
तेरी यादों की बारिश से मन निर्मल हो जाए
शुक्राना है प्रभु तेरा तूने ज्योति जगाई
जो बीत गया वो सपना था अब नया सवेरा है
भीतर सोया स्वर्णिम जीवन जागने को ठहरा है
चिंता क्रोध और पीड़ाओं को धीरे धीरे छोड़े
हर धड़कन में प्रेम भरा एक नया बसेरा है
काटोंवाली राह मिले तो मुसकाकर आगे बढ़ना
जीवन की हर मुश्किल को पीठ समझकर पढ़ना
जो सहना सीख गया है वो मजबूत बन जाता
आंसू भी मोती बन जाए यदि हंसकर उनको गढ़ता
शुक्राना है प्रभु तेरा तूने घर की राह दिखाई
मन के मैल को धोने की सुन्दर विधि समझाई
तेरी यादों की बारिश से मन निर्मल हो जाए
शुक्राना है प्रभु तेरा तूने ज्योति जगाई
सरल बने सहज बने मन में कोई बोझ ना हो
बातों में मधुराई हो दिल में कोई खोज ना हो
हर मिलने वाला बना है शुभभावना का दीप जले
जीवन ऐसा सुंदर हो जिसमें कोई सोच ना हो
जो कुछ पाया जीवन में सब तेरी ही मत है
हर अनुभव में छिपी हुई कोई मधुर हिकमत है
आज हृदय से कहते है बस धन्यवाद अनंत तुझे
तेरी कृपा से यह जीवन सचमुच सुंदर जन्नत है
शुक्राना है प्रभु तेरा तूने घर की राह दिखाई
मन के मैल को धोने की सुन्दर विधि समझाई
तेरी यादों की बारिश से मन निर्मल हो जाए
शुक्राना है प्रभु तेरा तूने ज्योति जगाई
