"स्नेह भरी दृष्टि से तेरी तृप्त हुआ जग सारा
स्नेह भरी दृष्टि से तेरी तृप्त हुआ जग सारा
प्यासे अधरों पर जैसे
प्यासे अधरों पर जैसे
छलकाए अमृत धारा
बाबा प्यार तुम्हारा.....
सुखे मन मानसरोवर सबके
स्नेह निर भर छलक उठे
सप्त सुरो की मधुर रागिनी
दिल वीणा पर झनक उठे
नव प्रभात की किरणों सा
नव प्रभात की किरणों सा
हरता गम का अंधियारा
हरता गम का अंधियारा
बाबा प्यार तुम्हारा.....
प्यासी धरती की प्यास बुझे
अंबर के सब आस मिटे
दसों दिशाओं में जैसे की खुशियों की खैरात बटे
चले मंद शीतल बयार
चले मंद शीतल बयार
कण-कण पुलकित कर जाता
कण कण पुलकित कर जाता
बाबा प्यार तुम्हारा....
स्नेह भरी दृष्टि से तेरी तृप्त हुआ जग सारा
स्नेह भरी दृष्टि से तेरी तृप्त हुआ जग सारा
प्यासे अधरों पर जैसे
प्यासे से अधरों पर जैसे
छलकाए अमृत धारा
बाबा प्यार तुम्हारा...."
