"सूक्ष्म वतन का वो फरिश्ता
नाम है जीसका ब्रम्हा बाबा
इस धरती पर आया हैं
एक संसार बसाया है
मीठा मधुबन आबू में महकाए
सूक्ष्म वतन का वो फरिश्ता
नाम है जीसका ब्रम्हा बाबा
हिलने लगी है मन की कलिया
चीर वसंत जो मुस्काए
निले अंबर से ज्ञान का सूरज
अपनी किरने फैलाए
बिखरा कर वो सारे जगत में
रंग भरता मन मूरत में
मीठा मधुबन आबू में महकाए
सूक्ष्म वतन का वो फरिश्ता
नाम है जीसका ब्रम्हा बाबा
संगम युग में अमृतवेला
स्नेह के मौसम लहराए
प्यारे बाबा प्यार से हमको
रोज रोज यू सहलाए
हम बच्चों को देकर दृष्टी
बदल रहा है सारी सृष्टि
मीठा मधुबन आबू में महकाए
सूक्ष्म वतन का वो फरिश्ता
नाम है जीसका ब्रम्हा बाबा
इस धरती पर आया हैं
एक संसार बसाया है
मीठा मधुबन आबू में महकाए
सूक्ष्म वतन का वो फरिश्ता
नाम है जीसका ब्रम्हा बाबा
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