सुनी थी राह मेरी अब उजली हो गई
हाथों में हाथ है प्रभु के तकदीरे चल गई
सुनी थी राह मेरी अब उजली हो गई
अब जो चले कदम जन्नत ही मंजिल है
अब जो चले कदम जन्नत ही मंजिल है
उनके रहम और कर्म अब मुझे हासिल है
बुझ रहा था चिराग अब रोशनी मिल गई
सुनी थी राह मेरी अब उजली हो गई
फासलें कम हुए है प्रभु की पनाहों में
फासलें कम हुए है प्रभु की पनाहों में
दास्ता बन रही है प्रभु की निगाहों में
कोई दौलत दिल की अब सारी मिल गई
सुनी थी राह मेरी अब उजली हो गई
सुनी थी राह मेरी अब उजली हो गई
हाथों में हाथ है प्रभु के तकदीरे चल गई
सुनी थी राह मेरी अब उजली हो गई
