सुनो ओ पंछियों सुनो ये आत्माओं
उड़ उड़ जाओ दूर जाओ क्यों बैठे हो पंख पसार
सुनो ओ पंछियों सुनो ये आत्माओं
तन का जाल हटाओ योग के पंख लगावो
तन का जाल हटाओ योग के पंख लगावो
बुला रहा है घर चलने तुजको शिव निराकार
बुला रहा है घर चलने तुजको शिव निराकार
उड़ उड़ जाओ दूर जाओ चांद तारो के पार
सुनो ओ पंछियों सुनो ये आत्माओं
सतयुग में हुआ आना चुगने आए थे दाना
सतयुग में हुआ आना चुगने आए थे दाना
जनमो जन्म के चक्र में दिया निजघर को विसार
जनमो जन्म के चक्र में दिया निजघर को विसार
याद दिलाए शिव समझाए करो फिर से विचार
सुनो ओ पंछियों सुनो ये आत्माओं
ये दुनिया है पराई वो अपना घर है स्थाई
ये दुनिया है पराई वो अपना घर है स्थाई
अविनाशी शांति का वो है एक ही द्वार
अविनाशी शांति का वो है एक ही द्वार
चलो अब सारे देह से न्यारे बिंदु सा रूप उतार
सुनो ओ पंछियों सुनो ये आत्माओं
उड़ उड़ जाओ दूर जाओ क्यों बैठे हो पंख पसार
सुनो ओ पंछियों सुनो ये आत्माओं
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