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"सूरत में जिनके प्रभु का नूर वाणी में झरता मधुर मधुर जीते जो दिल का वो सबका स्नेह प्यार दे सबको ओ करूणामय सूरत में जिनके प्रभु का नूर वाणी में झरता मधुर मधुर जीते जो दिल का वो सबका स्नेह प्यार दे सबको हो करूणामय ऐसी थी प्रकाशमनी प्यारी दादी ओ ऐसी थी प्रकाशमनी प्यारी दादी दादी का ओ खुमार संगम की है बहार सबके लिए है सदा किया बेहद उपकार त्याग तपके गूंजती है फिजाओं में ए कहाणी भुले न ए न भूलेंगे हो मां जगकल्याणी आ.... ऐसी थी प्रकाशमनी प्यारी दादी ओ ऐसी थी प्रकाशमनी प्यारी दादी शीतल चित चांदनी सी पेरी अंगत वाणी तू लक्ष्मी शक्ति दायिनी तू महा वर दानी तेरी दृष्टी है निराली मां तू कितनी भोली भाली परमार्थी पुरुषार्थि मां तू महा शक्तिशाली ऐसी थी प्रकाशमनी प्यारी दादी ओ ऐसी थी प्रकाशमनी प्यारी दादी सूरत में जिनके प्रभु का नूर वाणी में झरता मधुर मधुर जीते जो दिल ओ सबका स्नेह प्यार दे सबको ओ करूणामय ऐसी थी प्रकाशमनी प्यारी दादी ओ ऐसी थी प्रकाशमणि प्यारी दादी ऐसी थी प्रकाशमनी प्यारी दादी"