

तन के भव्य भाल पर....तन के भव्य भाल पर, विराज रहा में,तन के भव्य भाल पर विराज रहा में, खोल पुथुलियोंके पट ....हो ..हो.. हो... खोल पुथुलियोंके पट ....निहार रहा में... निहार रहा में... तन के भव्य भाल पर विराज रहा में, खोल पुथुलियोंके पट ....हो ..हो ..हो... खोल पुथुलियोंके पट ....निहार रहा में...निहार रहा में... तन के भव्य भाल पर.... में प्रकाश पुंज हूं, अनाथ शक्तिवानु हूं, दिव्य ज्योति बिंदु हूं, में शिव पीत समानु हूं, में प्रकाश पुंजू हूं, अनाथ शक्तिवानु हूं, दिव्य ज्योति बिंदु हूं, में शिव पीत समानु हूं, सृष्टि का शृंगार हूं.. इस जगत का सार हूं, सृष्टि का शृंगार हूं, इस जगत का सार हूं, योनि ओ मे श्रेष्ठ मानव जन्म का आधार हूं, प्राण भरे तन में संचार रहा में.... तन के भव्य भाल पर.... विराज रहा में... खोल पुथुलियोंके पट .... हो ..हो ..हो... खोल पुथुलियोंके पट .... निहार रहा में... निहार रहा में... तन के भव्य भाल पर.... विराज रहा में... धरती का सितारा हूं, देह का उजाला हूं, सर्व का सहारा हूं में.. शिव पिता का प्यारा हूं,... धरती का सितारा हूं, देह का उजाला हूं, सर्व का सहारा में.. शिव पिता का प्यारा हूं,... न्यारा हूं, निराला हूं, प्रसन्न चित वाला हूं, न्यारा हूं, निराला हूं, प्रसन्न चित वाला हूं, न्यारा हूं तू प्यारा भी हूं शीतल हूं ज्वाला हूं.... दिव्य गुण से निज को निथ निकारा रहा में, तन के भव्य भाल पर.... विराज रहा में... खोल पुथुलियोंके पट .... हो ..हो ..हो... खोल पुथुलियोंके पट .... निहार रहा में... निहार रहा में... तन के भव्य भाल पर.... विराज रहा में... दूर हर नशे मगर, एक नशे में चूरू हूं, में कुदायी नूर हूं , चेतन कोहिनूर हूं... दूर हर नशे मगर, एक नशे में चूरू हूं, में कुदायी नूर हूं, चेतन कोहिनूर हूं, खुशियों से भरपुर, दिल में रखे ये गरूर, खुशियों से भरपुर, दिल में रखे ये गरूर, टान लू जो चाहु तो कर सकता जरूर हूं, संग शिव के स्वर्ग भू पे ला रहा हूं में.. तन के भव्य भाल पर.... विराज रहा में... खोल पुथुलियोंके पट .... हो ..हो ..हो... खोल पुथुलियोंके पट .... निहार रहा में... निहार रहा में... तन के भव्य भाल पर.... विराज रहा में... तन के भव्य भाल पर.... विराज रहा में...