

"तेरे प्यार की छत्रछाया में आत्म दीप जलाया है तेरे प्यार की छत्रछाया में आत्म दीप जलाया है इस मन के मंदिर में बाबा हर पल मौज मनाया है तेरे प्यार की छत्रछाया में आत्म दीप जलाया है इस मन के मंदिर में बाबा हर पल मौज मनाया है तेरे प्यार की छत्रछाया में बुझा न सकेगी आंधी आ.. बुझा न सकेगी आंधी कोई प्रेम के इस दीपक को हरदम पीते हैं बाबा ज्ञान अमृत उस दीपक को उम्मीदों का किला बनाकर नीव को दृढ़ बनाया है उम्मीदों का किला बनाकर नीव को दृढ़ बनाया है इस मन के मंदिर में बाबा हर पल मौज मनाया है तेरे प्यार की छत्रछाया में हम खुशनसीब हैं हमें आ.. हम खुश नसीब हैं हमें जिंदगी जीना आ गया पतझड़ हो या बसंत हो मुस्कुराना आ गया मेरे दिल में जवा उमंगे उत्सव हर पल मनाया है मेरे दिल में जवान उमंगे उत्सव हर पल मनाया है इस मन के मंदिर में बाबा हर पल मौज मनाया है तेरे प्यार की छत्रछाया में कालिया ही क्या अब हमें आ .. कलियां ही क्या अब हमें कांटों से भी प्यार है तेरे खातिर जग पर बाबा अब ये जा निसार है परोपकार की राह में बाबा हमसफर तुम्हे बनाया है परोपकार की राह में बाबा हमसफर तुम्हे बनाया है इस मन के मंदिर में बाबा हर पल मौज मनाया है तेरे प्यार की छत्रछाया में आत्म दीप जलाया है तेरे प्यार की छत्रछाया में आत्म दीप जलाया है इस मन के मंदिर में बाबा हर पल मौज मनाया है तेरे प्यार की छत्रछाया में आत्म दीप जलाया है तेरे प्यार की छत्रछाया में.."