"तू ही पतितो को पावन बनाता
कल्प के अंत में तुही तो आता
गीता का ज्ञान हमें तू सुनाता
राजयोग यहा पे हमे तू सिखाता
तू ही पतितो को पावन बनाता
कल्प के अंत में तुही तो आता
सतयुग में यहा थे देवी देवताये
लक्ष्मी नारायण का था राज्य यहापे
ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
सब सोलह कला संपूर्ण थे यहापे
था सुख ही सुख था न
यहा पे यहां पे यहां पे
बारासो पचास साल बीते
बारासो पचास साल बीते
बारासो पचास साल बीते
बारासो पचास साल बीते
त्रेता में यहा थे देवी देवताए
राम और सीता का था राज्य यहा पे
ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
सब चौदह कला सम्पूर्ण थे यहा पे
था सुख ही सुख था ना
यहा पे यहां पे यहां पे
बारासो पचास साल बीते
बारासो पचास साल बीते
बारासो पचास साल बीते
बारासो पचास साल बीते
द्वापर में यहा थे पुजारी पुजारी
रावण का हुआ था राज्य यहा से
ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
सब आठ कला संपूर्ण थे यहा पे
थोड़ा दुख बढ़ा न यह पे
यहां पे यहां पे यहां पे
बारासो पचास साल बीते
बारासो पचास साल बीते
बारासो पचास साल बीते
बारासो पचास साल बीते
कलियुग में यहा है सब पापी ही पापी
रावण का पॉप बढ़ा हुआ है यहा पे
ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
सब जीरो कला हो गए है यहा पे
दुख ही दुख है न यहां पे
यहा पे यहां पे यहां पे
तू ही पतितो को पावन बनाता
कल्प के अंत में तुही तो आता
गीता का ज्ञान हमें तू सुनाता
राजयोग यहा पे हमे तू सिखाता
तू ही पतितो को पावन बनाता
कल्प के अंत में तुही तो आता
संगम में यहा है बाबा आया हुआ
गीता में दिया हुए वचनो अनुसार
ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
सबको है ये पैगाम स्वयं परमात्मा का
की अब है घर जाना
यहां से यहांसे यहां से
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