"याद आने के संग - संग, तुम चले आते हो
तुम ....... बहुत याद आते हो
तुम ....... बहुत याद आते हो
याद आने के संग -संग , तुम चले आते हो
तुम......बहुत याद आते हो
तुम....... बहुत याद आते हो .....
तन के इस पिंजरे से ,हम को छुड़ाते हो
आत्मा पंछी को ,योग में उड़ाते हो
देह की दुनिया से, रूह को ले जाते हो ,रूह को ले जाते हो
तुम .....बहुत याद आते हो
तुम...... बहुत याद आते हो
मधुबन में बाबा तुम ,जब जब ही आते हो
ज्ञान गुणों रत्नों से,हम को सजाते हो
सेवा ये देकर हमारे ,भाग्य बनाते हो
भाग्य बनाते हो
तुम ...... बहुत याद आते हो
तुम....... बहुत याद आते हो
संगम पर आकर बाबा, प्यार लुटाते हो
मीठी मुरली सुनाकर ,हमको लुभाते हो
दुनिया भुलाकर बाबा ,वतन में ले जाते हो
वतन में ले जाते हो
तुम ........ बहुत याद आते हो
तुम ........ बहुत याद आते हो
विकारों से हमको बचाकर, पावन बनाते हो
आत्म -अभिमानी रहना, हमको सिखाते हो
संपूर्ण हमको बनाकर ,स्वर्ग में ले जाते हो..., स्वर्ग में ले जाते हो
तुम...... बहुत याद आते हो
तुम...... बहुत याद आते हो
याद आने के संग -संग , तुम चले आते
हो
तुम ......बहुत याद आते हो
तुम......बहुत याद आते हो
तुम.......बहुत .....याद आते हो"
