उठ, जाग, अब देर न कर,
बढ़ चल, अब कदम धर।
रात अंधियारी बीत गई,
प्रभात किरण फिर मुस्काई।
उठ, मेरा हाथ थाम, और आ,
मुझ परमपिता की ओर आ...
मैं हूँ सत्य, मैं हूँ आधार,
देता हूँ सबको सुख अपार।
उठ, मेरा हाथ थाम, और आ,
मुझ परमपिता की ओर आ...
मुरली की मीठी तान बज रही,
हर दिशा से पुकार आ रही।
मैं बुला रहा हूँ बाँह पसार,
मेरे संग चल, भूल यह संसार।
उठ, मेरा हाथ थाम, और आ,
मुझ परमपिता की ओर आ...
बंधन सब जग के तोड़ दे,
ज्ञान-योग का दीप जला दे।
सत्य-धाम की राह पे चल,
यही है भाग्य बदलने का पल।
उठ, मेरा हाथ थाम, और आ,
मुझ परमपिता की ओर आ...
तेरे लिए ही गगन सजा है,
तेरे लिए ही धरा खिली है।
मैं भगवान बुला रहा हूँ कब से,
अब मिलन मना मुझ से।
उठ, मेरा हाथ थाम, और आ,
मुझ परमपिता की ओर आ...
उठ, जाग, अब देर न कर,
बढ़ चल, अब कदम धर।
उठ, मेरा हाथ थाम, और आ,
मुझ परमपिता की ओर आ...