उठो कुमारों, जागो कुमारों
अपना भाग्य अब तुम सँवारों
प्रचण्ड ऊर्जा के तुम भंडार हो।
शिव के तुम चैतन्य अवतार हो।।
तुम अखिल विश्व का प्रकाश हो।
स्वतंत्रता का खुला आकाश हो।।
उठो कुमारों, जागो कुमारों
ओ शिव बाबा के राज-दुलारों
सौ हिमालयों से भी तुम बड़े हो।
सागर से भी तुम गहरे हो।।
तुम्हारे संकल्प हैं धधकते अँगारे।
बोल में तुम्हारे वरदानों के भंडारे।।
उठो कुमारों, जागो कुमारों
अपने कर्मों को तुम सुधारों
योग तुम्हारा जैसे कि दावानल।
ज्वालामुखी से जलते तुम प्रबल।
तूफानों में कश्ती को मोड़ दो।
व्यर्थ की चट्टानों को तोड़ दो।।
उठो कुमारों, जागो कुमारों
एक भगवान को तुम निहारों
चेतना में हैं तुम्हारी चिंगारियाँ।
पार कर लो रास्ते की दुश्वारियाँ।।
आसमानी बिजली-सी तुम्हारी चाल।
जीवन तुम्हारा गुलाब जैसा खुशहाल।।
उठो कुमारों, जागो कुमारों
अपनी शक्ति को पहचानो
प्रचण्ड ऊर्जावान तुम्हारी पहचान।
परमात्म शक्ति तुम्हारी श्रेष्ठ शान।।
साहस का तुम अडिग स्तम्भ हो।
चैन से मत बैठो, सेवाधारी अखंड हो।।
उठो कुमारों, जागो कुमारों
माया से अब न हारो
रक्त में दौड़ रही बलिदान की बूंदें।
यूँ न बैठो तुम, आँखें मूँदे।।
पुरुषार्थ की तुम बुलंद हुंकार हो।
मायावी चुनौतियों की ललकार हो।।
उठो कुमारों, जागो कुमारों
मधुबन-सा हर घर को सजाओ
सुन लो आत्माओं की दर्दभरी पुकार।
तुम हो विश्व के विशेष तारणहार।।
देते चलो जगत को शक्तियों की सकाश।
अग्निवीर बनकर फैलाते चलो प्रकाश।।
उठो कुमारों, जागो कुमारों
बाबा के ओ दिव्य सितारों।।
