विश्व एक परिवार है
प्रभु पिता के हम सब बच्चे
घर अपना संसार है
तन कुटिया में हम रहते हैं आसन अपना भाल
चमक रही आत्मायें जैसे हों गुदड़ी के लाल
आपस में हम भाई-भाई रखना प्यार अपार है
विश्व एक परिवार है....
सृष्टि नाटक मंच है हम सब है अभिनयकर्त्ता
बना बनाया खेल हो रहा जैसा जो करता, भरता
नेक कर्म का नेक नतीजा यही ज्ञान का सार है
विश्व एक परिवार है.....
आओ हम निज परिवर्तन से जग परिवर्तन लायें
परिवर्तन के पथ पर चलकर सुखमय सृष्टि बनायें
हम सब के अपने हैं, ये सुख-शान्ति आधार है
विश्व एक परिवार है......
