"व्यक्त से जाओ भले अव्यक्त में तो आओगी
व्यक्त से जाओ भले अव्यक्त में तो आओगी
दूर हो रही तन से पर ना दूर मन से जाओगी
अश्रु पुरीत नैनों से ए प्राण तुझको अलविदा
कल्प भर को दादी तुझ को अलविदा अलविदा
कल्प भर को दादी तुझ को अलविदा है अलविदा
तुमने ही सिखलाया है हम को न रोना है कभी
सब के आंसु पोंछने है नैन गीले है सभी
तुमने ही सिखलाया है हम को न रोना है कभी
सब के आंसु पोंछने है नैन गीले है सभी
नैन गीले है सभी
यादों की महफिल में दादी लौट फिर फिर आओगी
यादों की महफिल में दादी लौट फिर फिर आओगी
दूर हो रही तन से पर ना दूर मन से जाओगी
आपका अस्वस्थ दिखना मात्र एक बहाना था
आपका अस्वस्थ दिखना मात्र एक बहाना था
इस बहाने पाव पे अपने रहना खडे सिखलाना था
इस बहाने पावो पे अपने रहना खडे सिखलाना था
रहना खडे सिखलाना था
चंदन में कुंदन की दमक दिखलाई वो दिखलाओगी
दूर हो रही तन से पर ना दूर मन से जाओगी
व्यक्त से जाओ भले अव्यक्त में तो आओगी
श्वास और संकल्प से भी जो दिया संसार को
श्वास और संकल्प से भी जो दिया संसार को
जग भूल पाएगा नहीं मां तुम्हारे प्यार को
जग भूल पाएगा नहीं वो मां तुम्हारे प्यार को
वो मां तुम्हारे प्यार को
मंदिरों में मूर्ति बन वरदान देती जाओगी
दूर हो रही तन से पर ना दूर मन से जाओगी
व्यक्त से जाओ भले अव्यक्त में तो आओगी
जा रही तो जल्दी मिलने का भी तो वादा करो
जा रही तो जल्दी मिलने का भी तो वादा करो
बाप सा बने आप सा बने दूर हर बाधा करो
दूर हर बाधा करो
शिव शक्ति सेनानी अभी भी शक्ति भरने आओगी
शिव शक्ति सेनानी अभी भी शक्ति भरने आओगी
दूर हो रही तन से पर ना दूर मन से जाओगी
चिर निद्रा में लेटी हुई लगता अभी उठ जाओगी
जग को जगानेवाली दादी तुम नहीं सो पाओगी
तुम नहीं सो पाओगी
सब मिलने आए स्वागत को वैसी बाहें फैलाओगी
सब मिलने आए स्वागत को वैसी बाहें फैलाओगी
दूर हो रही तन से पर ना दूर मन से जाओगी
अश्रु पुरीत नैनों से ए प्राण तुझको अलविदा
कल्प भर को दादी तुझ को अलविदा है अलविदा
अलविदा है अलविदा
अलविदा अलविदा"
