
अगर अच्छा बनना है तो स्व को देखो और जिनके कनेक्शन में आओ उनकी अच्छाई को देखो" (05-01-07)
जब शान्त स्वरूप होकर सभी ओम् शान्ति बोलते हैं तो | चेहरे में शान्ति, प्रेम, खुशी और शक्ति यह चारों इकट्ठी दिखाई पड़ती हैं। चारों का आपस में बड़ा गहरा सम्बन्ध है।
दिल में बहुत बातें होते हर बात स्पष्ट हो और उसमें सार भी भरा हुआ हो क्योंकि कोई भी बात स्पष्ट होने से कभी डाउट नहीं उठता, मूंझते नहीं हैं। निश्चय मजबूत है तो अडोल अचल स्थिति बनाना इज़ी है, यह भी मेरा भाग्य है। संशय डोलायमान करता है, हिलाने लग पड़ता है फिर जब हिलते हैं तो चलायमान होते हैं जिससे रेत के लड्डू बन जाते हैं। बार-बार चलायमान, डोलायमान होने वाले सेकण्ड में रेत के लड्डू के समान हो जायेंगे।
अगर किसी को जीभ रस बहुत है, लेकिन हज़म करने की ताकत ही है। जब हज़म नहीं कर सकता है तो ताकत कहाँ से आवे? सिर्फ बाबा की मुरली बहुत अच्छी, बहुत अच्छी कहते रहने से क्या होगा? क्योंकि अन्दर में डोलायमानी और चलायमानी का कुछ गड़बड़ घोटाला है इसलिए हज़म ही नहीं होता है। तो कई भाई-बहनों की शक्ल को देखते लगता है कि इन्हों ने शायद कुछ खाया पिया नहीं है। लगता ही नहीं है कि यह कोई ब्रह्माभोजन खाया हुआ है या ब्रह्मा बाबा के मुख से कुछ ज्ञान सुना है। परचिंतन की जो खामी है वो कभी ब्राह्मण भी बनने नहीं देगी। देवता तो सतयुग में बनेंगे उसके लिये फरिश्ता बनना है। जो सच्चा पक्का ब्राह्मण होगा वही फरिश्ता बनेगा।
जो सच्चा होगा वो पक्का बन सकता है। थोड़ा भी झूठा है तो उसके आगे मुश्किलातें बहुत आयेगी, उनके लिए मुस्कराना मुश्किल है। और जो सच्चा और पक्का होगा उसके लिए सबकुछ सहज होगा, वही यह गीत गायेगा कि तुमने हमको अपना बनाके मुस्कराना सिखा दिया...। तेरे मुस्कराहट से किसी की मुश्किलातें मिट जायें तो जो बाबा ने दिया है उसको यूज़
करो तो मुक्ति और जीवनमुक्ति का वर्सा मिलेगा। मुक्ति माना कोई भी बात से फ्री, कोई मुझे रोक नहीं सकता, बन्धनमुक्त है। जीवनमुक्त माना न्यारा और प्यारा है। जीवन में है पर सबसे न्यारा है। बन्धनमुक्त माना लगाव, झुकाव और दबाव से मुक्त। कलियुगी किसी भी प्रकार के कर्मबन्धनों से मुक्त। वह किसी के आगे झुकता नहीं। उसे नशा रहता है मेरे बाबा जैसा कोई नहीं।
कभी भी किसी प्रकार से शक्ल छोटी न हो जाये। कभी गुस्से में लाल हो जायेगी, कभी थोड़ा अपमान हुआ तो पीली हो जायेगी। सोचेगा यह काम तो कुछ भी नहीं करते नाम इनका ही आता है, मेरा कभी नाम ही नहीं आता है, यह सोचा तो लगा माया का गोला। अरे! नाम से काम नहीं। तुम काम ऐसा करो जो नाम भगवान के मुख पर आये। पर जब तक यहाँ वहाँ नाम-रूप की बीमारी है और जो नाम कमाने के लिए काम करता है वो भगवान के मुख की सन्तान नहीं है। भगवान के मुख की सन्तान वो है जिसके मुख पर उसका नाम है, उसका नाम फिर भगवान के मुख पर है।
ज्वालामुखी स्वरूप यानि ऐसी पॉवरफुल याद, योग और तपस्या हो। ऐसी स्थिति पावरफुल और शीतला स्वरूप के सन्तुलन वाली हो। इसके लिए धैर्यवत हैं तो शीतल हैं। बहुत अच्छा है, सब ठीक है... ऐसे करते, कहते आगे बढ़ते बढ़ाते रहो। कोई भी अच्छी फीलिंग वा खराब फीलिंग हो तो वो नज़रों से पता चल जाता है। जिसके पास बाबा के लिए सच्ची दिल है और बाबा हमको जो बनाना चाहता है उसके बिगर और कोई तमन्ना नहीं है, और कोई इच्छा नहीं है तो बाबा की नज़रों से निहाल हो जायेंगे। जो बाबा की नज़रों से निहाल होने का अनुभव करता है वो कभी बेहाल नहीं होता है। तो हमारी भी स्थिति ऐसी हो जो हमारे सामने आये वो नज़र से निहाल हो जाये। सबके दिल से शुक्रिया निकले। अच्छा।
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