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… माया आये और युद्ध करो, भगाओ; फिर कभी हार, कभी जीत हो – यह चींटी मार्ग का पुरूषार्थ है। अब तो तीव्र पुरूषार्थ करने का समय है, ... (अव्यक्त मुरली - 10 January 1988)
धीमी गति से पुरुषार्थ करना
Slow Purusharth; Dull Effort
మంద పురుషార్థము