अव्यक्त मुरली
… जहाँ चाहो, जब चाहो मन को वहाँ स्थित कर सकते हो। कभी मन उदास नहीं हो सकता है, यह है मन की शक्ति जो अलौकिक जीवन में वर्से वा वरदान में प्राप्त है ...
29 October 1987
हिंदी
To a desired place
నచ్చిన ప్రదేశానికి
इच्छित स्थान पर