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... बापदादा सोच रहे थे कि पुराने संसार और पुराने संस्कार-इससे सदा के लिए संकल्प और स्वप्न में भी मरना, ऐसा जीते-जी मरना कौन और कब मनायेंगे? ... (अव्यक्त मुरली - 3 November 1992)
जीते हुए दुनियावी बातों से मरना
Living while dying with the worldly matters
జీవిస్తూనే ప్రాపంచిక విషయాలతో మరణించుట