अव्यक्त मुरली
… जैसे मधुमक्खी की नजर फूलों पर रहती ऐसे आपकी नजर सर्व की विशेषताओं पर हो। हर ब्राह्मण आत्मा को देख सदा यही गुण गाते रहो– “वाह श्रेष्ठ आत्मा वाह”! ...
6 April 1982
संस्कृत
A Honey bee
తేనెటీగ
फूलों का रस चूसने वाली मक्खी