अव्यक्त मुरली
... मणि सदा अपनी चमक द्वारा बाप का भी शृंगार बनती और औरों को भी रोशनी देती है। तो ऐसे मस्तकमणि बन औरों को भी ऐसे बनाने वाले हैं ...
19 March 1988
संस्कृत
Jewel
మణి
रत्न