अव्यक्त मुरली
... सदा झूले में झूलते रहो। सर्व से रास मिलाते हुए,खुशी की रास करते रहो। इसको कहा जाता है – संगमयुग की प्रालब्ध स्वरूप। ...
3 November 1981
संस्कृत
A circular dance
రాస క్రీడ; రాస
एक नाच जिसमें चक्कर बांधकर नाचते हैं