अव्यक्त मुरली
... इस बेहद के कल्प वृक्ष के अन्दर स्नेह और भावना की रस्सी से कल्प पहले भी बांधा था और अब भी रिपीट हो रहा है। ...
11 April 1983
संस्कृत
A rope
త్రాడు
डोरी