संस्कृत
... धर्मराज भी उनका स्वागत करेगा। स्वागत करानी है या बार-बार सौगन्ध खानी है। अभी नहीं करेंगे, अभी नहीं करेंगे – यह बार-बार कहना पड़ेगा ... (अव्यक्त मुरली - 7 February 1980)
शपथ
An oath
శపథము