... बाबा ने तो समझा दिया है कि ज्ञान यज्ञ में अनेक प्रकार के विघ्न तो पड़ेंगे। बहुत अत्याचार होंगे। कामेशु, क्रोधेशु हैं ना।...
4 February 2017
साकार मुरली (भगवतगीता श्लोक अध्याय - 3, श्लोक 37)
It is lust alone, which is born of contact with the mode of passion, and later transformed into anger. Know this as the sinful, all-devouring enemy in the world.
రజో గుణము నుండి ఉత్పన్నమయ్యే కామమే తదుపరి క్రోధముగా పరిణామం చెందుతుంది. దీనిని లోకంలో సర్వనాశనం చేసే పాపిష్టి దానిగా తెలుసుకొనుము
रजोगुण में उत्पन्न हुई यह कामना है यही क्रोध है यह महाशना (जिसकी भूख बड़ी हो) और महापापी है इसे ही तुम यहाँ (इस जगत् में) शत्रु जानो