... वह देवताओं को कैसे रचते हैं, यह नहीं जानते। महिमा गाते हैं– मूत पलीती कप्पड़ धोए। तो जो मनुष्य मूत पलीती थे उनको देवता बनाया। ...
21 January 2017
साकार मुरली (जपजी साहब, गुरुग्रन्थ)
When urine doth thy clothes pollute, rinsing in soap will make them clean. But it is the mind that has been polluted. That can be washed only by the Love intoxication of NAM - the sacred name of the Holy Lord
మూత్ పలీతీ కప్పడ్ ధోయే దే సాబున్ లాయీ వో ధోయే
భరియే మత్ పాపోం కే సంగ్, ఒహు ధోపై నావే కే సంగ్
మలమూత్రాలతో పాడైన వస్త్రాన్ని సబ్బుతో ఉతికి శుభ్రపరచవచ్చు, కానీ మనసుకు వికారాల మలినం అంటుకుంటే ఆ మలినాన్ని ఈశ్వర నామ స్మరణతోటే శుద్ధపరుచుకోవాలి
मूत पलीती कप्पड़ धोए, दे साबून लाई वो धोये
भरिए मत पापों के संग, ओहु धोपै नावे के संग
मल मूत्र से मलिन वस्त्र साबुन से साफ हो जाते हैं पर जो मन में विकारों की गंदगी है उन्हें तो ईश्वर का नाम स्मरण कर ही धोया जा सकता है। जब कपड़े मैले हो जाते हैं तब साबुन से अच्छी तरह से धोकर साफ करते हैं, यदि मनुष्य की बुद्धि पापों से मलीन हो जाए, तो वह पाप अकाल पुरुख के नाम में प्यार करने से ही धोया जा सकता है - ऐसे ही विकारों से मलिन मन को परमात्मा की याद से स्वच्छ बनाना है
ಕೊಳಕಾದ ಬಟ್ಟೆಗಳನ್ನು ಸೋಪಿನಿಂದ ತೊಳೆದು ಸ್ವಚ್ಛಗೊಳಿಸುವಂತೆಯೇ, ದುರ್ಗುಣಗಳು ಮತ್ತು ಪಾಪಗಳಿಂದ ಕಲುಷಿತವಾಗಿರುವ ಮನಸ್ಸನ್ನು ಪರಮಾತ್ಮನ ನಾಮ ಸ್ಮರಣೆಯಿಂದ ಶುದ್ಧೀಕರಿಸಬೇಕು.