आदिमे आए थे उस घरसे अंत्त वहा ही जाना है
आदि अंत का मंत्र यही है सबको यहीं सुनाना है।
अब घर जाना है कि अब घर जाना है
अब घर जाना है कि अब घर जाना है
आदि अंत का मंत्र यही है सब को यही सुनाना है।
अब घर जाना है कि अब घर जाना है
अब घर जाना है कि अब घर जाना है
सबका मालिक जहा का वासी सब आत्माए जहा से आती
जिस घर के हम है भाती जहा आत्मा शांति पाती
शांति धाम या ब्रमहलोक हो
शांति धाम या ब्रमहलोक हो
उसे न कभी भुलाना है।
अब घर जाना है कि अब घर जाना है
अब घर जाना है कि अब घर जाना है
शांति का संदेश सुनाए शांति की किरणे फैलाए
शांति कुंड की ज्योति से हर एक ज्योति को जगाए
चलेंगे होकर देह से न्यारे
चलेंगे होकर देह से न्यारे
साथ सभिको जाना है
अब घर जाना है कि अब घर जाना है
अब घर जाना है कि अब घर जाना है
ज्ञान योग का यही है सार जाना है इस जगके पार
परमधाम से आए है शिव ले जाने हम सबको साथ
कल्प की है यह अंतिम बेला
कल्प की है यह अंतिम बेला
करमातित बन जाना है
अब घर जाना है कि अब घर जाना है
अब घर जाना है कि अब घर जाना है
आदि अंत का मंत्र यही अब सब को सुनाना है।
अब घर जाना है कि अब घर जाना है
अब घर जाना है कि अब घर जाना है
अब घर जाना है कि अब घर जाना है
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