आंँखें खोलो उठो
अब सवेरा हुआ
आंँखें खोलो उठो
अब सवेरा हुआ
देखो फिर ए ना कहना
जगाया नहीं
आंँखें खोलो उठो
अब सवेरा हुआ
देखो फिर ए ना कहना
जगाया नहीं
आबू पर्वत पे है
ज्ञान सूर्य उदय
आबू पर्वत पे है
ज्ञान सूर्य उदय
प्यार फिर ये ना कहना
दिखाया नहीं
आंँखें खोलो उठो
अब सवेरा हुआ
आ आ आ आ आ......
आ आ आ आ आ......
प्रभु मिलन प्यास में
दर्श की आस है
काशी में काबा में
भटके कैलाश में
प्रभु मिलन प्यास में
दर्श की आस है
काशी में काबा में
भटके कैलाश में
आ..चुके..हो..अभी..
मिल रहे हैं सभी..
आ चुके हो अभी
मिल रहे हैं सभी
मिल लो फिर ए ना कहना मिलाया नहीं
आंँखें खोलो उठो
अब सवेरा हुआ
देखो फिर ए ना कहना
जगाया नहीं
आंँखें खोलो उठो
अब सवेरा हुआ
पाने को एक झलक
तीनों युगों की ललक
आया हो भारत में वो
छोड़ कर के फलक
पाने को एक झलक
तीनों युगों की ललक
आया हो भारत में वो
छोड़ कर के फलक
ब्रह्मा तन को धारे..
ब्राह्म से है पधारे
ब्रह्मा तन को धारे
ब्रह्म से है पधारे
सुन लो फिर ए ना कहना
बताया नहीं
आंँखें खोलो उठो
अब सवेरा हुआ
देखो फिर ए ना कहना
जगाया नहीं
आंँखें खोलो उठो
अब सवेरा हुआ
आ आ आ आ आ .....
आ आ आ आ आ .....
दीन बंधु मिला
स्नेह सिंधु मिला
ज्योति बिंदु से जगमग
जहाँ है खिला
दीन बंधु मिला
स्नेह सिंधु मिला
ज्योति बिंदु से जगमग
जहाँ है खिला
दिव्य जीवन का देते हैं
वरदान वे
दिव्य जीवन का देते हैं
वरदान वे
ले लो फिर ए ना कहना
दिलाया नहीं
आंँखें खोलो उठो
अब सवेरा हुआ
देखो फिर ए ना कहना
जगाया नहीं
आबू पर्वत पे है
ज्ञान सूर्य उदय
आबू पर्वत पे है
ज्ञान सूर्य उदय
प्यार फिर ए ना कहना
दिखाया नहीं
आंँखें खोलो उठो
अब सवेरा हुआ
