संकल्प करें: मैं यहाँ नहीं हूँ। मैं आकाश के पार, दूसरे आकाश में हूँ, जहाँ चारों ओर श्वेत प्रकाश फैला हुआ है। वहाँ परम आनंद का अनुभव हो रहा है। मैं वहीं उपस्थित हूँ।
सामने परमपिता बाबा कमलासन पर विराजमान हैं। उनका स्वरूप अत्यंत सुंदर है। उनके मस्तक में ज्ञान-सूर्य चमक रहा है। बाबा मुझे दृष्टि दे रहे हैं.....
दृष्टि लेते ही मन से बाबा को निमंत्रण दें— "बाबा, आजाइए हमारे पास। चलिए मेरे साथ नीचे।"
अब देखें, बाबा ने हमारा हाथ पकड़ लिया है और हम दोनों साथ-साथ नीचे आ रहे हैं। अपने स्थान पर पहुँचकर अनुभव करें कि बाबा हमारे सामने विराजमान हैं। उनके दिव्य वाइब्रेशन्स को महसूस करें। उनका भवन अत्यंत दिव्य और विशाल है। उनके पवित्र वाइब्रेशन्स मुझमें समाहित हो रहे हैं......
अब जो कुछ भी बाबा से कहना चाहते हैं, अधिकार और सच्चे मित्र के भाव से कह दें। बाबा की दृष्टि का अनुभव करें। फिर देखें, बाबा अपने धाम की ओर वापस जा रहे हैं।
ॐ शांति।
