

बाबा मेरे दिल के है प्यारे संग सदा ही रहते है अपने ही जैसा मीठा बनाते मिठे मिठे बच्चे कहते है बाबा मेरे दिल के है प्यारे संग सदा ही रहते है अपने ही जैसा मीठा बनाते मिठे मिठे बच्चे कहते है तुम्हीं से पाएं सुख है निराले जीवनमे आए कितने उजाले तुम्हीं से पाएं सुख है निराले जीवनमे आए कितने उजाले अनुभव के मोती संजोए हुए है यादों के लहरों में लहरा रहे है ज्ञान का जो अमृत देते है अब तो अंतर में देह तो है नहीं अपने ही जैसा मीठा बनाते मिठे मिठे बच्चे कहते है मन से छलकते स्नेह की किरणे आनंद जो पाए अन्तःकरण में मन से छलकते स्नेह की किरणे आनंद जो पाए अन्तःकरण में संपन्नता का वरदान पाए संपूर्णता की ओर हमको उड़ाए हाथो में हाथ देकर के साथ सदा मेरे चलते हो अपने ही जैसा मीठा बनाते मिठे मिठे बच्चे कहते है बाबा मेरे दिल के है प्यारे संग सदा ही रहते है अपने ही जैसा मीठा बनाते मिठे मिठे बच्चे कहते है —-----------------------------------