फील करें, पल भर में मैं फरिश्ता कमलासन पर बैठकर उड़ चला सूक्ष्मलोक की ओर, आकाश के पार।
ये फरिश्तों की दुनिया, वहीं हो जाएँ स्थित। ये फरिश्तों की दुनिया, चारों ओर सफेद चाँदनी, आनंद ही आनंद।
सामने कमलासन पर विराजमान हैं बाप-दादा।
बहुत शक्तिशाली आभामंडल फैला है, बिखरी हैं दिव्य किरणें चारों ओर।
मस्तक में सर्वशक्तिवान चमक रहे हैं। सामने से उनकी किरणें मुझ पर पड़ रही हैं।
बाबा दृष्टि दे रहे हैं।
दृष्टि लेते हुए मन की चिंताएँ और बोझ बाबा को सुनाकर अर्पित कर दें।
बाबा ने मस्तक पर तिलक लगाया और बोले, “बच्चे, मुझसे जो चाहो, वरदान ले लो।"
बोला, नाथ, दाता, विधाता और वरदाता हम पर मेहरबान हैं। जो वरदान चाहिए, अधिकार से माँग लें। बाबा ने सिर पर हाथ रख दिया और तथास्तु कर दिया। जो वरदान चाहा था, वो दे दिया।
उनसे दृष्टि लेकर हम वापस आ गए।
ओम शांति |
