इस दुनिया से बहुत दूर, उस देव युग में, जिसमें हमने ढाई हजार वर्ष बिताए थे, जिसमें हम स्वयं देव स्वरूप में थे, बना लें अपना चित्र।
स्वर्णिम संसार, दूर-दूर तक चमकते सोने-हीरों के महल, प्रकृति का अनुपम सौंदर्य।
घरों के आंगन में खड़े हैं पुष्पक विमान।
मैं यहाँ पहुँच जाऊँ—मेरा ये देव स्वरूप, मेरे वो देव संस्कार, संपूर्ण निर्विकारी स्थिति, Most Powerful, सभी Effects से मुक्त, प्रकृति के मालिक, संपूर्ण स्वरूप में, संपूर्ण विश्व के मालिक।
चेंज करें अपनी कॉन्शियसनेस को।
ओम शांति।
