"छोड़ शहर का शोर
चलो हम चले गांव की ओर
जहा पर पीपल वाली छाव
जहा पर ममता की है ठाव
वो ऐसा अपना प्यारा गांव
बसती है भारत की आत्मा
आज भी भारत की गांव में
लेकिन पडी है बेडिया बुराइयोकी पाव मे
बसती है भारत की आत्मा
आज भी भारत की गांव में
लेकिन पडी है बेडिया बुराइयोकी पाव मे
बेडी को तोडें रूढी को छोडें
रिश्ता ले प्रभु से जोड़
जहा पर पीपल वाली छाव
जहा पर ममता की है ठाव
वो ऐसा अपना प्यारा गांव
आओ जीवन की जमीन पर
ज्ञान का हल हम चलाए
शुभ कर्मो की खेती करके
पुण्य का फसल उगाए
आओ जीवन की जमीन पर
ज्ञान का हल हम चलाए
शुभ कर्मो की खेती करके
पुण्य का फसल उगाए
सत्कारो की करले कमाई
निर्धन रहे ना कमजोर
जहा पर पीपल वाली छाव
जहा पर ममता की है ठाव
वो ऐसा अपना प्यारा गांव
है किसान यही अन्नदुत
जो जग जीवन का दाता है
भोलो पे भगवान रीझे
वो प्रेम पुष्प बरसाता है
है किसान यही अन्नदुत
जो जग जीवन का दाता है
भोलो पे भगवान रीझे
वो प्रेम पुष्प बरसाता है
कर्मयोगी राजयोगी
बन लाए प्रभु ओर
जहा पर पीपल वाली छाव
जहा पर ममता की है ठाव
वो ऐसा अपना प्यारा गांव
छोड़ शहर का शोर
चलो हम चले गांव की ओर
जहा पर पीपल वाली छाव
जहा पर ममता की है ठाव
वो ऐसा अपना प्यारा गांव "
