"एक किरण परमधाम से आती
एक किरण परमधाम से आती
मुझ कौड़ी को हीरे तुल्य बनती
एक किरण परमधाम से आती
एक किरण परमधाम से आती
मुझ कौड़ी को हीरे तुल्य बनाती
मैं लिपटी थी घोर विकारों में
मैं लिपटा था घोर विकारों में
मुझको पावन वो कर जाती
एक किरण परमधाम से आती
एक किरण परमधाम से आती
मुझ कौड़ी को हीरे तुल्य बनाती
मुझ कौड़ी को हीरे तुल्य बनाती
आ..
मैं कर्मों को बिगाड़ रहा था
वो मेरा श्रृंगार है करती
मैं कर्मों को बिगाड़ रही थी
वो मेरा श्रृंगार है करती
मैं दुखों में तड़प रही थी
मैं दुखों में तड़प रहा था
दर्द वो मेरा हर ले जाती
एक किरण परमधाम से आती
एक किरण परमधाम से आती
मुझ कौड़ी को हीरे तुल्य बनाती
मुझ कौड़ी को हीरे तुल्य बनाती
चाहा मुझे वो खुद सा बना ले
मुझको वो आप समान बनाती
चाहा मुझे वो खुद सा बना ले
मुझको वो आप समान बनाती
जब मैंने उसे याद किया है
जब मैंने उसे याद किया है
आनंद सागर में लहराती
एक किरण परमधाम से आती
एक किरण परमधाम से आती
मुझ कौड़ी को हीरे तुल्य बनाती
मुझ कौड़ी को हीरे तुल्य बनाती
आ..
स्नेह से सब का पालन करती
दिव्य गुणों में निखार वो लाती
स्नेह से सब का पालन करती
दिव्य गुणों में निखार वो लाती
जब उससे है प्यार मांगा तो
जब उससे है प्यार मांगा तो
मुझको वो अनमोल खुशी दे जाती
एक किरण परमधाम से आती
एक किरण परमधाम से आती
मुझ कौड़ी को हीरे तुल्य बनाती
मुझ कौड़ी को हीरे तुल्य बनाती"
