सबसे पहले अपने को आत्मा के रूप में देखें। मैं मस्तक के मध्य में स्थित एक चमकती हुई मणि हूँ। बाबा ने आकर मुझे जगाया है। उन्होंने मेरी आध्यात्मिक आँखें खोल दी हैं, मुझे तीसरा नेत्र प्रदान किया है और मेरी वास्तविक पहचान याद दिलाई है।Source Of Energy हूँ। मुझसे चारों ओर रंग-बिरंगी दिव्य किरणें फैल रही हैं।
अब बाबा के वचनों को स्मृति में लाएँ और पूरे मन से स्वीकार करें। "बच्चे, तुम साधारण नहीं हो। तुम इस सृष्टि की महान आत्मा हो।" इन शब्दों को अपने अंतर्मन में गहराई से समा जाने दें। मैं साधारण नहीं हूँ, मैं सृष्टि की महान आत्मा हूँ। मैं इस संसार की ज्योति हूँ, जहान का नूर हूँ। मैं एक पुण्य आत्मा हूँ। यदि मैं इस संसार में न होता, तो यह संसार अधूरा और वीरान प्रतीत होता। यही मेरी वास्तविक महत्वता है।
बाबा कहते हैं, "तुम पवित्रता की शक्ति से भरपूर हो। युग परिवर्तन के महान कार्य में मैंने तुम्हें अपना साथी बनाया है। तुम बहुत जिम्मेदार और महान आत्मा हो। मैंने तुम्हें अपनी दिव्य शक्तियाँ प्रदान की हैं। तुम वही हो, जिनकी स्मृति में आज भी मंदिरों में पूजा होती है। तुम्हारे प्रत्येक शुभ संकल्प, शुभ भावना और दुआ का प्रभाव संसार की प्रत्येक आत्मा तक पहुँचता है।"
अब अनुभव करें कि ऊपर सर्वशक्तिमान से दिव्य शक्तियों का प्रकाशमय फव्वारा मुझ पर बरस रहा है। एकाग्र होकर अनुभव करें कि ये शक्तियाँ मेरे भीतर समाती जा रही हैं और मुझे अत्यंत शक्तिशाली बना रही हैं।
अब अनुभव करें कि मैं धरती रूपी ग्लोब के ऊपर कमल आसन पर विराजमान हूँ। बाबा की दिव्य शक्तियाँ मेरे माध्यम से सम्पूर्ण संसार में फैल रही हैं। मैं एक पूर्वज आत्मा हूँ। मेरे माध्यम से फैलती हुई ये दिव्य शक्तियाँ समस्त आत्माओं की पालना, सहयोग और कल्याण का माध्यम बन रही हैं।
ओम् शान्ति।
