पल भर में अनुभव करें कि मैं सूक्ष्म लोक में, आकाश के ऊपर पहुँच गया हूँ। यहाँ चारों ओर श्वेत चाँदनी फैली हुई है। इतनी दिव्य चाँदनी, मानो एक साथ अनेक पूर्णिमा के चंद्रमा उदित हो गए हों। यहाँ परम आनंद का अनुभव हो रहा है !
सामने कमल आसन पर बाप-दादा विराजमान हैं। उन्हें बिल्कुल स्पष्ट देखें। उनकी दिव्य आभा चारों ओर फैल रही है। वे अत्यंत प्रेम से अपनी बाहें फैलाकर हमारा आह्वान कर रहे हैं, "आओ बच्चे, स्वागत है तुम्हारा।" वे हमें अपनी दिव्य दृष्टि दे रहे हैं। यह दृष्टि परम सुखदायी है, सभी विघ्नों को हरने वाली है।
बाबा कहते हैं, "बच्चे, मन के सारे बोझ और चिंताएँ मुझे दे दो और स्वयं को हल्का कर लो। डबल लाइट बन जाओ।" अपने मन के सभी बोझ उन्हें सौंप दें। उन्हें अपनी हर चिंता सुना दें, क्योंकि सारे संसार का बोझ हरने वाला हमारे बोझ भी सहज ही हर लेगा। अपने जीवन की पूरी बागडोर उनके हाथों में सौंप दें और अनुभव करें कि अब हमारी योजना वही बना रहे हैं।
अब अनुभव करें कि बाबा ने अपना वरदानी हाथ आपके सिर पर रख दिया है। उनके स्पर्श से आपके सारे बोझ समाप्त हो रहे हैं। उनके प्यार, आशीर्वाद और दिव्य दृष्टि से आपके भीतर शक्ति भरती जा रही है |
ओम् शान्ति।
