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मस्तक सिंहासन पर हम आत्माएं राजन करें और बने और शासन चलाएं कर्म इंद्रियां कर्मचारी हमारी भ्रुकुटी बीच दरबार अपना सजाएं मस्तक सिंहासन पर हम आत्माएं राजन बने और शासन चलाएं करें मंथना मिलकर मन मंत्री से समाचार पूछे सज्जन संतरी से समाचार पूछें सज्जन संतरी से बड़ी सावधानी से इस राजधानी को माया की छाया से पल-पल बचाएं मस्तक सिंहासन पर हम आत्माएं राजन बने और शासन चलाएं कर्मेंद्रियां कर्मचारी हमारी वृकुटी बीच दरबार अपनी सजाएं है बुद्धि का मुंसिफ बड़ा न्याय कारी मैं राजा भी राजी सुखी जनता सारी मैं राजाधिराज जी सुखी जनता सारी सुसंस्कारों की जो सेना सजग हो तो दुर्गुणों के दुश्मन से धोखा ना खाएं मस्तक सिंहासन पर हम आत्माएं राजन बने और शासन चलाएं कर्मइंद्रियां कर्मचारी हमारी वृकुटी बीच दरबार अपना सजाएं खुदा दोस्त की हमपे है छत्रछाया कि खोया हुआ राज फिर से दिलाया खोया हुआ राजू फिर से दिलाया उपकार उसने किए हम पर इतने की आभार धरती गगन मिलकर गाए मस्तक सिहासन पर हम आत्माएं राजन बने और शासन चलाएं कर्मइंद्रियां कर्मचारी हमारी वृकुटी बीच दरबार अपना सजाएं......