

मीठी इशू दादीजी यह की आदि रत्न यज्ञ धन संभालने बाबा की भरोसेमंद मीठी इशू दादीजी यह की आदि रत्न यह धन संभालने बाबा की भरोसेमंद सदा हमे मिलती रहे सदा हमे मिलती रहे यू आपकी ये पालना दादीजी इस दुनिया से सदाही उपराम रही दादीजी इस दुनिया से सदाही उपराम रही कर्मतीत अव्यक्त फरिश्ता बनना हमे सिखा रही तीव्र पुरुषार्थ करके तीव्र पुरुषार्थ करके दादीजीसा बनना है अब समय पूरा हो रहा अब समय पूरा हो रहा हमे इशारा दे रहा प्रकृति हमे निहारे है बाबा हमे पुकारे है