मेरे बाबा मेरे बाबा गीत सुनहरे गाता हैं
मेरे बाबा मेरे बाबा गीत सुनहरे गाता हैं
प्यार में तेरे मन सांझ सवेरे सुख घनेरे पाता है
मेरे बाबा मेरे बाबा
ज्ञान सूर्य की किरणों से नित नित नवजीवन पाते हैं
ज्ञान सूर्य की किरणों से नित नित नवजीवन पाते हैं
प्यार के सागर की लहरों में लहर लहर लहराते हैं
अनुभव के मोती मिलते मन जितना गहरें जाता हैं
प्यार में तेरे मन सांझ सवेरे सुख घनेरे पाता है
मेरे बाबा मेरे बाबा
तुमको पाकर सब पाए अब और नहीं कुछ पाना हैं
तुमको पाकर सब पाए अब और नहीं कुछ पाना हैं
मिल गई मंजिल मिला अब मन का मीत सुहाना हैं
संग तुम्हारा इंद्रधनुष के रंग बिखेरे जाता हैं
प्यार में तेरे मन सांझ सवेरे सुख घनेरे पाता है
मेरे बाबा मेरे बाबा गीत सुनहरे गाता हैं
प्यार में तेरे मन सांझ सवेरे सुख घनेरे पाता है
मेरे बाबा मेरे बाबा
