निर्विघ्न तुम, निर्विघ्न तुम, हर बाधा से ऊँचे तुम… निर्विघ्न तुम, निर्विघ्न तुम, विजयी पथ के राही तुम… विघ्नों को चीरते, निडर तू आगे बढ़, विघ्नों को जीतते, निर्बाध अब तू बढ़। अटूट संकल्प लेकर, अनजानी राहों पर तू बढ़, जीवन के हर संघर्ष में, दुर्गम पथ पर तू बढ़। तूफानों से लड़ते, ज्वाला बनके आगे बढ़, अँधेरों को मिटाते, सूरज बनके अब तू बढ़। जहाँ राहें थक जातीं, अथक बन आगे बढ़, जहाँ हिम्मत डगमगातीं, अडिग बन आगे बढ़। भगवान जब साथ तुम्हारे, निर्विघ्न तू आगे बढ़, शिव बाबा जब पास तुम्हारे, निर्विघ्न तू आगे बढ़। निर्विघ्न तुम, निर्विघ्न तुम, हर बाधा से ऊँचे तुम… निर्विघ्न तुम, निर्विघ्न तुम, विजयी पथ के राही तुम…